समाजसेवी मेरी स्टो
   Date06-Nov-2019

प्रेरणादीप
अ पने समय की प्रख्यात लेखिका नारी स्वातंत्र्य की हिमायती मेरी स्टो अपनी किशोरावस्था में बहुत सुंदर लगती थी। इसकी चर्चा और प्रशंसा भी बहुत होती थी। इस पर लड़की को गर्व होने लगा और इतराकर चलने लगी। बात उनके पिता को मालूम हुई तो उन्होंने बेटी को बुलाकर प्यार से कहा - 'बेटी! किशोरावस्था का सौंदर्य प्रकृति की देन है। इस अनुदान पर उसी की प्रशंसा होनी चाहिए। तुम्हें गर्व करना हो तो साठ वर्ष की उम्र में शीशा देखकर करना कि तुम उस प्रकृति की देन को लंबे समय तक अक्षुण्ण रखकर अपनी समझदारी का परिचय दे सकीं या नहीं। इस शिक्षा का ही परिणाम था कि अपने अहंकार को गलाकर मेरी स्टो एक समाजसेविका के रूप में विकसित हो सकीं।