अपूर्व बलिदान
   Date05-Nov-2019

प्रेरणादीप
म ई 1999 में भारत के द्रास-कारगिल व बटालिक क्षेत्र में छिपकर पाकिस्तान की सेना ने हमला कर दिया। कारगिल की टाइगर पहाड़ी को मुक्त कराने की जिम्मेदारी नौवीं पैरा यूनिट के जांबाज कमांडो को सौंपी गई। कमांडो अपने दल के साथ एक के बाद एक कुछ फासले से पहाड़ी पर चढ़ रहे थे। फिरोजाबाद के ग्राम खेड़ा के निवासी नायक हेमसिंह भी कुछ सैनिकों के साथ पहाड़ी पर रस्सी के सहारे चढ़ रहे थे। जब वे ऊपर पहुँचने वाले ही थे, तो दुश्मनों ने गोली चला दी। भारतीय दल द्वारा गोली चलाने से दुश्मन अपने बंकरों में भागकर ऊपर से धुआंधार गोली बरसाने लगे। दुश्मन केवल 40-50 गज की दूरी पर ही थे। मौत की परवाह किए बिना भारतीय सैनिक चढ़ते रहे और दुश्मन के सैनिकों को ढेर कर दिया। आगे बढ़ते हुए हेमसिंह के शरीर में बम के टुकड़े धंसते गए। अपने साथियों का आग्रह ठुकराकर अपने मोर्चे पर डटे रहे और अपनी बंदूक से चार दुश्मन सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया, तब साँस ली। घायल हेमसिंह को 20 किलोमीटर दूर अस्पताल ले जाने को सैनिक तैयार ही थे कि मातृभूमि के प्रति कर्तव्य पूरा कर हेमसिंह शहीद हो गए। उस रणबाँकुरे ने मातृभूमि का ऋण इस प्रकार चुकाया।