भारत ने आरसीईपी समझौते पर दस्तखत से किया इंकार
   Date05-Nov-2019

बैंकॉक भारत ने दक्षिण-पूर्वी एवं पूर्व एशिया के 16 देशों के बीच मुक्त व्यापार व्यवस्था के लिए प्रस्तावित क्षेत्रीय समग्र आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) समझौते को अपने लाखों लोगों के जीवन एवं आजीविका के लिए प्रतिकूल बताते हुए आज उस पर हस्ताक्षर करने से साफ इंकार कर दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यहां तीसरी आरसीईपी शिखर बैठक में दो टूक शब्दों में भारत का फैसला सुना दिया। विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) विजय ठाकुर सिंह ने यहां संवाददाताओं को यह जानकारी दी। श्रीमती सिंह ने कहा कि भारत ने शिखर बैठक में इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करने के निर्णय की जानकारी दे दी है। यह निर्णय मौजूदा वैश्विक परिस्थिति तथा समझौते की निष्पक्षता एवं संतुलन दोनों के आकलन के बाद लिया गया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने बैठक में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कथन को उद्धृत करते हुए कहा कि कोई भी कदम उठाते हुए यह सोचना चाहिए कि कतार में सबसे पीछे खड़े व्यक्ति को इससे क्या फायदा होगा। उन्होंने कहा कि इस बैठक में भारत द्वारा उठाये गए मुख्य मुद्दों का कोई समाधान नहीं निकल सका है। हमारा निर्णय देश के करोड़ों लोगों के जीवन एवं आजीविका से जुड़ा है। समझौते के प्रावधान उनके हितों के प्रतिकूल हैं। इसलिए वर्तमान परिस्थितियों में भारत आरसीईपी में शामिल नहीं हो रहा है।
भारत-प्रशांत क्षेत्र में भारत-जापान ने परस्पर सहयोग बढ़ाने का लिया फैसला - भारत और जापान ने भारत-प्रशांत क्षेत्र में शांति, समृद्धि और प्रगति से लक्ष्यों को हासिल करने के लिए द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने का फैसला लिया है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) शिखर सम्मेलन से इतर सोमवार को यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के दौरान इस बात पर सहमति बनी।