कुतर्क की पीड़ा
   Date04-Nov-2019

प्रेरणादीप
ए क कोल्हू था, उसमें बैल काम करता था। कोल्हू को एक तेली चलाता था। उसने बैल को कोल्हू में जोत दिया। बैल कोल्हू में चल रहा था और इस बीच तेली अपना काम कर रहा था, तभी वहाँ एक तर्कशास्त्री पहुँचा, देखा-बड़ा आश्चर्य है, बैल के पीछे कोई नहीं है, बैल अपना काम कर रहा, तेली अपना काम कर रहा है, बैल चल रहा है। तर्कशास्त्री ने तेली से पूछा-'अच्छा, ये कैसे होता है? तुम अपना काम कर रहे होते हो, कभी-कभी घानी से दूर भी चले जाते हो, फिर भी तुम्हारी घानी चल रही है, ये कैसे होता है? अगर बैल खड़ा हो जाए तो तुमको कैसे पता चलेगा?Ó तो तेली बोला- 'मैंने बैल के गले में घंटी बाँध रखी है। बैल रुकेगा तो घंटी रुक जाएगी। मैं फिर बैल को समझा दूंगा, हाँक दूंगा, फिर बैल चल देगा।Ó 'और बैल खड़ा हो करके गरदन हिलाए तो?Ó तेली बोला- 'ये अच्छी बात है कि हमारा बैल तर्कशास्त्री नहीं है। अगर तर्क सीखने के लिए चला जाता तो मुश्किल खड़ी हो जाती।Ó