संसद के कार्य ने पकड़ी गति...
   Date29-Nov-2019

महाराष्ट्र के सत्ता संग्राम का असर राजधानी दिल्ली और संसद के दोनों सदनों में भी भरपूर दिखा, लेकिन इस बीच जिस तरह से सरकार ने विधेयक पेश करने, उस पर बहस करने और उसे पारित करवाने में तेजी दिखाई, वह संसदीय कार्यप्रणाली की दृष्टि से सकारात्मक बदलाव के रूप में देखी जा सकती है... जबकि विपक्ष का एकतरफा कार्य इस पूरे सप्ताहभर में सिर्फ सोनिया-राहुल और प्रियंका की एसपीजी सुरक्षा को लेकर विरोध-प्रदर्शन करना या फिर सदन से वाकआउट करने का रहा.., इस बीच जो महत्वपूर्ण विधेयक सदन के पटल पर रखे गए और उन पर चर्चा हुई, उसने हर किसी का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया है... देश के 4 लाख 81 हजार से अधिक उभयलिंगी (किन्नर) समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए देश की संसद में विधेयक को मंजूरी दी... इस विधेयक पर एक घंटे से अधिक की चर्चा होना और इस तबके के लिए समस्याओं के समाधान और उनके अधिकारों को लेकर मंथन होना बहुत प्रेरणादायी है... तभी तो यह विधेयक ध्वनिमत से राज्यसभा में पारित भी हो गया... दूसरा महत्वपूर्ण पहलू दादर-नागर हवेली एवं दमन-दीव का एकीकरण करके चारों को एक केन्द्र शासित राज्य के रूप में पहचान देने वाला विधेयक भी लोकसभा में पेश हो चुका है... इस विधेयक से बड़ा लाभ यह होगा कि इन सभी क्षेत्रों की भौगोलिक सीमाएं न केवल एक होगी, बल्कि अलग-अलग राज्यों के मान से इन पर जो खर्चा होता रहा है, वह संयुक्त रूप से अब एक केन्द्र शासित राज्य को बेहतर रूप से विकसित करने में सहयोग कर सकेगा... अगर इन दोनों विधेयकों से परे सभी राज्यों में एनआईडी स्थापित करने के लिए जो विधेयक लोकसभा में पारित हुआ, वह भी शैक्षणिक विकास की दृष्टि से महत्व रखता है... क्योंकि चार डिजाइन संस्थानों को राष्ट्रीय महत्व का घोषित करके उनमें शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाने तथा प्रवेश के लिए राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा आयोजित करने जैसे प्रावधानों वाले 'राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी)-2019Ó को मंजूरी प्रदान की गई है... राज्यसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी थी... फिलहाल आंध्रप्रदेश के अमरावती, असम के जोरहाट, मध्यप्रदेश के भोपाल और हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित इन डिजाइन संस्थान को स्वायत्त संस्थान बनाने और इन्हें राष्ट्रीय महत्व के संस्थान घोषित करने के लिए विधेयक लाया गया था... फिलहाल तो इन चार संस्थानों से यह लाभ होगा कि इन संस्थानों को 1960 के नियम के तहत पंजीकृत रूप से डिग्री व डिप्लोमा देने का अधिकार नहीं था, लेकिन अब ये इसके लिए स्वतंत्र होंगे... स्वायत्त संस्थान बनने से इन संस्थानों के द्वारा कृषि, स्वास्थ्य, परिवहन व अन्य क्षेत्रों में हस्त कौशल को मजबूती मिल सकेगी... जबकि विशेष सुरक्षा समूह कानून (एसपीजी) को लंबी चर्चा के बाद लोकसभा में ध्वनिमत से मंजूरी मिलना भी सरकार की सफलता है.., वहीं युवाओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का कारण बन चुकी ई-सिगरेट पर भी प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक लोकसभा में पारित होना व्यसन मुक्त भारत की तरफ बड़ा कदम माना जाना चाहिए... कुल मिलाकर इस सप्ताह सदन का महत्वपूर्ण समय कुछ ऐसे सामाजिक बदलाव और व्यवस्था सुधार की पहल करने वाले प्रयासों में बिता है, जिसका दूरगामी लाभ होगा...
दृष्टिकोण
लॉ बोर्ड की फितरत...
अयोध्या मामले में देश के सर्वोच्च न्याय मंदिर के फैसले को देश का मुस्लिम समुदाय एकतरफा रूप से स्वीकार कर चुका है, यही नहीं अयोध्या मामले में पक्षकार रहे सुन्नी वक्फ बोर्ड भी न्याय मंदिर के फैसले को चुनौती न देते हुए पुनर्विचार याचिका का विचार त्याग चुके हैं... सुन्नी वक्फ बोर्ड के 8 में से कुल 7 सदस्यों ने गत दिनों बैठक में हिस्सा लिया था, जिसमें से 6 सदस्यों ने एकतरफा रूप से पुनर्विचार याचिका का विरोध करते हुए वर्तमान सर्वसम्मत निर्णय को स्वीकार करने की बात कही थी... सुन्नी वक्फ बोर्ड के फैसले से पूर्व देश की 100 दिग्गज मुस्लिम हस्तियों ने भी पुनर्विचार याचिका के विरोध में अपना मत प्रकट करके वर्तमान फैसले को सहज रूप से स्वीकार करने की बात कही थी... जिसमें भाजपा के हमेशा विरोधी रहे शबाना आजमी, नसरुद्दीन शाह जैसे कलाकारों ने भी न्यायालय के फैसले का समर्थन किया है... अब सवाल यह उठता है कि जब मामले के पक्षकार ही पुनर्विचार याचिका के विरोध में है, तब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड किस हैसियत से और किस मुँह से पुनर्विचार याचिका का निर्णय कर रहा है... क्या उन्होंने पहले इस मामले में पक्षकार बनने में कोई पहल की..? नहीं... फिर अब जब फैसला आ चुका है, देश और देश में निवासरत प्रत्येक हिन्दू-मुस्लिम फैसले को सर्वसम्मति से शिरोधार्य कर चुका है, तब शांति व सौहार्द बिगाडऩे की फितरत कहीं लॉ बोर्ड पर ही भारी न पड़ जाए...