विधानसभा के बजट सत्र में पेश होगा राइट-टू-वॉटर एक्ट- पांसे
   Date29-Nov-2019

भोपाल द्य 28 नवम्बर।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सुखदेव पांसे ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में हर घर नल से जल पहुंचाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। प्रदेशवासियों को पानी का अधिकार दिलाने के लिए विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में राइट-टू-वाटर एक्ट का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। विधानसभा के आगामी बजट सत्र में यह एक्ट पारित करवाकर लागू कर दिया जाएगा। श्री पांसे ने कहा कि इस एक्ट के लागू होने पर मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य होगा, जहां लोगों को पानी का कानूनी अधिकार मिलेगा। उन्होंने बताया कि पानी का अधिकार कानून लागू करने के लिए बजट में एक हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री पांसे ने बताया कि ग्रामीण अंचलों में हर घर तक नल से जल पहुंचाने के लिए 68 हजार करोड़ रुपए की विस्तृत कार्ययोजना बनाई गई है। अभी तक 19 समूह जल योजनाएं पूर्ण कर 802 गांव की लगभग साढ़े 11 लाख से अधिक जनसंख्या को घरेलू नल कनेक्शन द्वारा जलप्रदाय प्रारंभ कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, 6672 करोड़ रुपए लागत की 39 योजनाओं का कार्य प्रगति पर है, जो अगले दो साल में पूरा हो जाएगा। इससे 6091 गांव की लगभग 64 लाख आबादी को पेयजल उपलब्ध होगा। श्री पांसे ने जानकारी दी कि 14 हजार 510 गांव के लिए 22 हजार 484 करोड़ रुपए की 45 समूह जलप्रदाय योजनाओं की डीपीआर तैयार कर ली गई है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन से लगभग एक करोड़ ग्रामीण आबादी को पेयजल उपलब्ध होगा। मंत्री श्री पांसे ने कहा कि प्रदेश में 5 करोड़ 88 लाख आबादी 1 लाख 28 हजार 231 ग्रामीण बसाहटों में निवास करती है। पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में इन क्षेत्रों में मात्र 12 फीसदी आबादी को ही पेयजल प्रदाय किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि इस भीषण स्थिति से ग्रामीणों को उबारने के लिए राज्य सरकार ने प्रत्येक परिवार को उसकी आवश्यकता के अनुरूप जल उपलब्ध करवाने का निश्चय किया है। पानी का कानूनी अधिकार इसी निश्चय का परिणाम है।
300 मीटर के दायरे में होगा एक शासकीय पेयजल स्रोत - मंत्री सुखदेव पांसे ने बताया कि राज्य सरकार ने नई पेयजल नीति में प्रावधान किया है कि जिन बसाहटों में गर्मी के मौसम में 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के मान से पेयजल उपलब्ध नहीं हो पाता है, उनमें नए हैंडपम्प लगाए जाएं। उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार में किसी भी बसाहट के 500 मीटर के दायरे में न्यूनतम एक शासकीय पेयजल स्रोत उपलब्ध कराने की व्यवस्था ग्रामीण माताओं और बहनों के लिए गर्मी के मौसम में कष्टदायी थी। राज्य सरकार ने इस समस्या को समाप्त करने के लिए नई पेयजल नीति में 300 मीटर के दायरे में कम से कम एक शासकीय पेयजल स्रोत उपलब्ध कराने का प्रावधान किया है।