चिटफंड में निवेश संबंधी विधेयक पर संसद की मुहर
   Date29-Nov-2019

लोस-रास कार्यवाही
नई दिल्ली ठ्ठ 28 नवंबर (वा)
चिटफंड कंपनियों में जमा धन राशि की सुरक्षा तथा वापसी से संबंधित चिटफंड (संशोधन) विधेयक 2019 को आज राज्यसभा ने ध्वनिमत से पारित कर दिया जिससे इस पर संसद की मुहर लग गई। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है। इस विधेयक को पिछली लोकसभा में स्थायी समिति में भेजा गया था और संशोधनों के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था। विधेयक के जरिये चिटफंड अधिनियम 1982 में बदलाव किया जाएगा। उधर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री हर्षवद्र्धन ने गुरुवार को ई-सिगरेट प्रतिबंधित करने वाला विधेयक राज्यसभा में पेश किया। उन्होंने कहा कि इससे नई पीढ़ी का भविष्य बचाने में मदद मिलेगी और तंबाकू का इस्तेमाल नियंत्रित किया जा सकेगा। यह विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है और यह 18 सितंबर को जारी अध्यादेश का स्थान लेगा।
वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने 'चिट फंड (संशोधन) विधेयक 2019Ó पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि पॉन्जी कंपनियों तथा चिटफंड कंपनियों में फर्क है और इस अंतर को बताने वाली जानकारी लोगों तक पहुंचना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चिटफंड एक ऐसी वैधानिक व्यवस्था है जिसमें गरीब अपना पैसा जमा कर लाभ अर्जित करें। इस विधेयक में ऐसे प्रावधान किए गए हैं कि किसी भी परिस्थिति में गरीबों का पैसा डूबेगा नहीं। विधेयक में इन चिटफंड कंपनियों में निवेश की सीमा तय की गई है। बढ़ी महंगाई को देखते हुए यह सीमा निजी स्तर पर एक लाख रुपए से बढ़ाकर तीन लाख रुपए तथा संस्थागत स्तर पर छह लाख रुपए से बढ़ाकर 18 लाख रुपए की गई है। राज्यों को अपने अनुरूप निवेश की सीमा तय करने का अधिकार दिया गया है। श्री ठाकुर ने कहा कि विधेयक में निवेशक को पूरा पैसा वापस मिलने का प्रावधान किया गया है। चिटफंड कंपनियों की सूची रिजर्व बैंक के पास भी है। उन्होंने कहा कि चिटफंड कंपनियों के कामकाज में किसी तरह की अनियमितता को रोकने के लिए रिजर्व बैंक किसी भी समय समीक्षा कर सकता है। राज्य सरकार को छूट है कि वह रिजर्व बैंक की सहमति से इस विधेयक के किसी प्रावधान में अपने हिसाब से बदलाव कर सकती हैं।