आदर्श जनसेवक
   Date28-Nov-2019

प्रेरणादीप
स मय के पाबंद स्वर्गीय लालबहादुर शास्त्री तब रेल मंत्री थे, वे सरदार नगर में हो रहे एक सम्मेलन में जा रहे थे। मार्ग में एक गाँव पड़ता था। उस गाँव से जब वे गुजर रहे थे, तो कुछ ग्रामीणों ने उनकी कार रोक ली। पूछा गया- 'क्या बात है?Ó तो ग्रामीणों ने कहा - 'एक गरीब किसान की औरत की प्रसूति का समय निकट है। कोई वाहन मिल नहीं रहा है और उसे पास के शहर भिजवाना है। यदि आप इस गाड़ी में उसे ले जाने दें तो अच्छा है।Ó 'नहीं यह गाड़ी एक सरकारी काम से सरदार नगर जा रही है।Ó शाीजी के ही किसी सहयात्री ने तत्काल उत्तर दिया तो ग्रामीणों ने अनुनय करते हुए कहा - 'जी उसे भी सरदार नगर ही तो ले जाना है।Ó
बात को अनसुनी करते हुए सहयात्री अधिकारियों ने गाड़ी चलाने को कहा, लेकिन शाीजी तुरंत ही गाड़ी से नीचे उतर पड़े और बोले- 'ले आओ उस बहन को। अपनी गाड़ी से बहन को समीपस्थ शहर पहुंचा दूँगा।Ó इस पर उनके साथी ने कहा - 'श्रीमान देर होती जा रही है और आप अभी यहीं खड़े हैं। वे लोग घंटे भर से पहले नहीं आएंगे।Ó 'न आने दो, पर सम्मेलन से ज्यादा महत्वपूर्ण है यह बहन। हम एक जनसेवक कहलाते हुए भी ऐसे नाजुक मौकों पर मुकर जाएं तो इससे बड़ी आत्मप्रवंचना और क्या होगी?Ó शास्त्री जी ने कहा औरउस ी को सरदार नगर पहुंचाकर ही माने।