एसपीजी सुरक्षा संबंधी विधेयक लोस में पेश
    Date25-Nov-2019

 
नई दिल्ली द्य 25 नवम्बर (वा)
पूर्व प्रधानमंत्री तथा उनके परिजनों को पद से हटने के बाद पांच साल तक विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) की सुरक्षा देने वाला विधेयक लोकसभा में पेश किया गया है। उधर कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर संसद के दोनों सदनों में जोरदार हंगामा किया, जिसकी वजह से कई बार के स्थगन के बाद कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी।
गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी ने महाराष्ट्र के मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के बीच 'विशेष सुरक्षा ग्रुप (संशोधन) विधेयक 2019Ó सोमवार को लोकसभा में पेश किया। विधेयक में कहा गया है कि एसपीजी सुरक्षा प्रधानमंत्री तथा उनके साथ रहने वाले उनके परिजनों के लिए है। प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद किसी व्यक्ति तथा उनके परिजनों को यह सुरक्षा पद छोडऩे की तारीख से पांच साल तक के लिए दी जाएगी। प्रधानमंत्री को विशेष सुरक्षा प्रदान करने वाला यह विधेयक 1988 में लाया गया था और उसके बाद इसमें चार बार संशोधन किए गए। इन संशोधनों में पूर्व प्रधानमंत्री को विभिन्न अवधि के लिए एसपीजी सेवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई थी। विधेयक में आखिरी बार 2003 में संशोधन किया गया था। विधेयक में कहा गया है कि वर्तमान राजनीतिक माहौल तथा पड़ोसी देशों के व्यवहार को देखते हुए प्रधानमंत्री के लिए अत्यंत कड़ी सुरक्षा आवश्यक है। पूर्व प्रधानमंत्रियों तथा उनके परिजनों तक यदि इस सेवा का विस्तार लम्बी अवधि के लिए किया जाता है तो ऐसी परिस्थिति में एसपीजी के लिए संशाधन पूरे करने मुश्किल हो जाएंगे, इसलिए इस विधेयक में कई बार संशोधन किया गया और यह सुरक्षा देने की व्यवस्था की गई। हंगामे के कारण दोनों सदनों में प्रश्नकाल एवं शून्यकाल में कोई विधायी कामकाज नहीं हो सका। शीतकालीन सत्र में यह पहला मौका है, जब विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी और पूरे दिन कोई विधायी कामकाज नहीं हो पाया। राज्यसभा में भोजनावकाश के बाद जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी कांग्रेस, माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक के सदस्य अपनी जगह पर खड़े हो गए। सदन में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने नियम 267 के तहत महाराष्ट्र के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की। उपसभापति हरिवंश ने कहा कि इस मामले में सभापति सुबह ही स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। दोबारा इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि सदन में विधायी कामकाज लंबित है और इसे पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है और वैसे भी महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन से संबंधित विषय को अभी सदन के पटल पर नहीं रखा गया है।