सिनेमा धर्म, जाति और नस्ल से परे - अमिताभ
   Date21-Nov-2019

 
पणजी द्य सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने कहा है कि तेजी से विखंडित होती दुनिया में केवल सिनेमा ही एक ऐसा माध्यम है, जो लोगों को आपस मे बांधे रख सकता है, क्योंकि सिनेमा भाषा, जाति, धर्म और नस्ल से परे होता है।दादा साहब फालके अवार्ड के लिए चयनित बिग बी ने अपनी फिल्मों के पुनरावलोकन का उद्घाटन करते हुए यह टिप्पणी की। कल से यहां शुरू हुए 50वां दादा साहब फालके अवार्ड में श्री बच्चन की छह फिल्में दिखाई जा रही हैं। पुनरावलोकन का आगाज उनकी 'पाÓ फिल्म से हुआ। श्री बच्चन ने दादा साहब फालके अवार्ड के लिए सरकार के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि वह इस प्रतिष्ठित सम्मान को प्राप्त करके कृतज्ञ महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा लग रहा है कि वह इस सम्मान के वास्तविक हकदार नहीं हैं, फिर भी लोगों के प्यार को देखते हुए इस पुरस्कार को ले रहे हैं। उन्होंने सिनेमा को विश्वव्यापी माध्यम बताते हुए कहा कि जब हम एक बंद हॉल में अंधेरे में बैठकर सिनेमा देखते हैं तो बगल में बैठे व्यक्ति की जाति नस्ल को भूल जाते हैं। सिनेमा भी भाषाओं के बंधन से परे होता है।
उन्होंने कहा कि सिनेमा एक ऐसा माध्यम है, जो तेजी से विखंडित होती दुनिया को बचाने का काम करता है और लोगों को जोड़कर रखता है। हमें शांतिप्रिय दुनिया बनाने के लिए एक-दूसरे का हाथ थामे आपस में मिलकर रहना होगा। उन्होंने कहा कि वह ऐसी फिल्में बनाएंगे, जो लोगों को जोड़कर रखें। श्री बच्चन ने फिल्म समारोह की तारीफ करते हुए कहा कि यह 50वां समारोह है। हर साल इसके डेलिगेट्स की संख्या बढ़ती जा रही है। वह इसके सुंदर आयोजन के लिए सरकार को बधाई देते हैं। पुनरावलोकन में उनकी 'दीवारÓ, 'शोलेÓ 'पीकूÓ 'बदलाÓ और 'ब्लैकÓ फिल्में भी दिखाई जाएंगी।