आरे कॉलोनी पेड़ कटाई मामला : आगामी आदेश तक उच्च्तम न्यायालय ने लगाई रोक
   Date08-Oct-2019

नई दिल्ली द्य उच्चतम न्यायालय ने मुंबई उपनगर की आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई पर अगले आदेश तक के लिए सोमवार को रोक लगा दी। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की विशेष पीठ ने संबद्ध पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया। विशेष पीठ ने पेड़ काटने के विरोध में हिरासत में लिए गए सभी पर्यावरण कार्यकर्ताओं की रिहाई का भी निर्देश दिया। न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा- पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए सभी पर्यावरण कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा किया जाना चाहिए। इन सभी की रिहाई जमानती बांड जमा कराने के बाद ही होगी। न्यायालय ने कहा कि पर्यावरण एवं वन संबंधी मामलों से संबंधित पीठ इस मामले की सुनवाई अब 21 अक्टूबर को करेगी और इस दौरान पेड़ों के काटे जाने के फैसले की वैधता पर भी जिरह होगी। संयोगवश इस पीठ की अध्यक्षता न्यायमूर्ति मिश्रा कर रहे हैं। गौरतलब है कि ऋषभ रंजन के नेतृत्व में विधि छात्रों के एक समूह ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। न्यायालय ने इस पत्र को जनहित याचिका में तब्दील करते हुए सुनवाई का निर्णय लिया और विशेष पीठ का गठन किया।
विधि छात्रों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने दलीलें पेश की, जबकि कुछ पर्यावरण कार्यकर्ताओं की ओर से गोपाल शंकरनारायणन ने जिरह की। उन्होंने कहा कि आरे जंगल को पारिस्थितिकीय तौर पर संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने के सवाल पर शीर्ष अदालत में एक याचिका लंबित है।
विशेष पीठ ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश उस वक्त दिया, जब महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि अब आरे में पेड़ों की कटाई की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि जितनी जरूरत है, उतने पेड़ काटे जा चुके हैं। उन्होंने कहा- जितने पेड़ काटने की आवश्यकता थी, वे काटे जा चुके हैं। हम आश्वस्त करते हैं कि अब और पेड़ काटे नहीं जाएंगे। हम सभी पर्यावरण पर पडऩे वाले इसके दुष्प्रभावों को लेकर चिंतित हैं। महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिन्दर सिंह पेश हुए।
विधि छात्रों ने पत्र में लिखा है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय ने आरे के पेड़ों को जंगल की श्रेणी में रखने से इंकार कर दिया और पेड़ों की कटाई संबंधी याचिकाएं खारिज कर दी। उनका कहना है कि सरकार बहुत जल्दबाजी में यह फैसला ले रही है। गौरतलब है कि आरे में कुल 2700 पेड़ काटे जाने की योजना है, जिनमें से 1,500 पेड़ों को गिरा दिया गया है।