संत की सीख
   Date07-Oct-2019

प्रेरणादीप
ए क राज्य में एक दानी राजा रहा करते थे। उनके महल में हर समय याचकों की भीड़ लगी रहती थी। एक बार एक संत उस राज्य में पधारे। उन्हें राजा की दानी प्रवृत्ति के विषय में पता चला तो वे राजा से मिलने पहुँचे। राजा ने उनका यथोचित स्वागत-सत्कार किया और पूछा- 'महात्मन्! मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ?Ó संत बोले- 'राजन्! आप दानवीर हैं, यह स्वयं एक धार्मिक गुण है, परंतु उसके साथ आप एक राजा भी हैं, इसलिए आपको राजधर्म भी याद दिलाने आया हूँ। आप से बिना परिश्रम दान का धन पाकर आपकी प्रजा श्रम से विमुख होकर आलसी बन गई है और यों ही दान पा लेने से उनके जीवन में कोई सार्थक परिवर्तन भी नहीं आ पा रहा है। इससे अच्छा है कि आप उन्हें रोजगार के साधन उपलब्ध कराएँ।Ó राजा को संत का कथन सही लगा और उन्होंने वही पथ अपना लिया।