सामाजिक बदलाव में काव्यात्मकता की अहम भूमिका-नायडू
   Date07-Oct-2019

भुवनेश्वर ठ्ठ 6 अक्टूबर (वा)
उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि काव्यात्मकता सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया को बढ़ावा देने में उत्प्रेरक की भूमिका निभा सकती है।
श्री नायडू ने रविवार को यहां 39वें विश्व कवि महासम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि कवियों में लोगों को प्रभावित करने और उनके विचारों में बदलाव लाने की क्षमता है और उन्हें इस क्षमता का उपयोग लोगों की भावनाओं, विचारों तथा मनोस्थिति में बदलाव लाने में करना चाहिए ताकि एक बेहतर विश्व का निर्माण हो सके। इस कार्यक्रम में विश्व के अनेक कवियों ने हिस्सा लिया है। श्री नायडू ने इस कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए कलिंग औद्योगिक तकनीकी संस्थान (केआईआईटी) और कलिंग सामाजिक संस्थान को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें इस महासम्मेलन की थीम 'कविता के माध्यम से करुणाÓ ने विशेष प्रभावित किया है। श्री नायडू ने कहा कि करुणा की भावना हम सभी में सहज प्रवृत्ति है और हमें इसे महसूस करना चाहिए तथा इसकी उस समय तक इसे बनाए रखने की आदत बनानी चाहिए जब तक यह हमारी आदतों और अवचेतन में समाहित नहीं हो जाए क्योंकि करुणा से करुणा का भाव पैदा होती है।
श्री नायडू ने कहा कि कविता मानवीय भावनाओं की बेहतरीन अभिव्यक्तियों में से एक है और सबसे गहरी अंतर्दृष्टि, भावनाओं की एक विस्तृत श्रृंखला और मानवीय अनुभव को चेतना के उच्चतम स्तर तक पहुंचाती है।
कविता मानवीय भावनाओं के आंतरिक रसायन विज्ञान पर बहुत प्रभाव डालती है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हमें चिकित्सकों , इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की आवश्यकता है, ठीक उसी प्रकार कवियों , लेखकों और गायकों की भी जरूरत है और साहित्य को बढ़ावा देना भाषाओं को प्रोत्साहित करने और संरक्षण देने का एक प्रभावशाली तरीका है। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों को अपनी स्थानीय भाषाओं में कविताओं, कहानियों और नाटकों को लिखना चाहिए तथा मातृभाषाओं को बचाने के लिए समर्पित तरीके से प्रयास करने चाहिए।