अमेरिका में नरेन्द्र से नरेन्द्र तक...
   Date06-Oct-2019

ब्रेक
के बाद
शक्तिसिंह परमार
भा रत के प्रधानसेवक अर्थात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 7 दिवसीय अमेरिका यात्रा अनेक मायनों में महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक होने के साथ ही दूरगामी परिणामों के आईने में पूर्णत: सकारात्मक कही जा सकती है...क्योंकि यह यात्रा मोदीजी की ऐसे कालखंड में हुई है, जब भारत ने अपने आंतरिक मामलों में एक स्पष्ट नीति के साथ आगे बढऩे का ना केवल साहस दिखाया, बल्कि वैश्विक मंच से भी अपने आंतरिक मामलों में अन्य देशों के हस्तक्षेप ना करने की नीति पर मुहर लगवाई है...जी हां, आजाद भारत के लिए नासूर बन चुके अनुच्छेद 370 एवं 35-ए को निष्प्रभावी करने के बाद मोदीजी अमेरिकी यात्रा पहुंचे थे...इसके पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान भारत के इस आंतरिक मामले को अंतर्राष्ट्रीय हस्तक्षेप का विषय बनाने के लिए ना केवल मुस्लिम देशों का दौरा कर आए थे, बल्कि अन्य देशों से भी इस संबंध में हस्तक्षेप का बार-बार आग्रह किया था...ऐसे में हर किसी को पता था कि मोदी की अमेरिकी यात्रा और संयुक्त राष्ट्र महासभा में उद्बोधन के समय कश्मीर का मुद्दा उठना तय है...लेकिन भारत की कूटनीति सफलता कहें या फिर आंतरिक और बाह्य दोनों मोर्चों पर जम्मू-कश्मीर को लेकर स्पष्ट नीति व निर्णय का परिणाम कि भारत अपने पहले दिन वाले रुख पर 60 दिन से अधिक यानी दो माह बाद भी अपनी धरती पर और सात समंदर पार विदेशी धरती (अमेरिका) पर भी अडिग रहा...क्या यह इतना आसान था कि भारत में कश्मीर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मध्यस्थता को चौथी बार खारिज करने का साहस दिखाया...
प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिकी यात्रा का मकसद सिर्फ संयुक्त राष्ट्र महासभा में संबोधित करना ही नहीं था, बल्कि भारत-अमेरिकी व्यापारिक रिश्तों को नए दौर के मान से नई ऊर्जा व नई दिशा देना भी तय था...साथ ही अरब देशों में बढ़ती आपसी खींचतान और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव का बेहद नाजुक दौर में पहुंचने के बाद तेल के मामले में अन्य राष्ट्रों की क्या स्थितियां हैं और हो..? इस पर मंथन के साथ ही विश्व में पर्यावरण संरक्षण संवद्र्धन को लेकर कार्बन उत्सर्जन का पैमाना निर्धारित होने के बावजूद अमेरिका का उससे स्वयं बाहर निकल जाना एवं विश्व में तेजी से भयावह रूप लेती वैश्विक आर्थिक मंदी को लेकर विकसित देशों और विकासशील देशों के साथ ही तीसरी दुनिया के देशों के संदर्भ में एक समान व्यवहार वाली रीति-नीति क्या हो..? इन पर एक विस्तृत विचार-विमर्श की यह घड़ी थी.., सही मायने में मोदीजी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच को भारत के संदर्भ में एक उचित अवसर के रूप में उपयोग करने में सफलता प्राप्त की है...
अमेरिका विश्व के मामलों में हस्तक्षेप का माद्दा रखता है, इसका उसने ईराक से लेकर तालिबान तक और ईरान से लेकर इजरायल-फिलीस्तीन के मामलों में अपने रुख के जरिए रह-रहकर दिखाया भी... स्वयं को विश्व चौधरी समझने वाला अमेरिका अपनी चौधराहट से वैश्विक मामले में अड़ंगेबाजी में भी कहां बाज आया है..? ऐसे में उसका कश्मीर के मामले में कुछ ज्यादा ही रुचि दिखाना न केवल चीन की बांछे खिला रहा था, बल्कि मुस्लिम राष्ट्रों को भी पाक परस्ती में खड़े होने को उत्प्रेरित कर रहा था... ऐसे में मोदीजी की यह अमेरिकी यात्रा अनेक विषयों का एक साथ पटाक्षेप करने का अवसर भी बन गई थी... जिस पर देश-दुनिया की निरंतर निगाहें लगी हुई थीं... पहले अमेरिका के ह्यूस्टन में 'हाउडी मोदीÓ के जरिए जो समां मोदी के समर्थन में प्रवासी भारतीय एवं भारी तादाद में अमेरिकी नागरिकों ने बांधा, उसने न केवल ट्रम्प को भी मोदी का मुरीद बना दिया, बल्कि विश्व को यह समझने में देर नहीं लगी कि नया भारत अनेक मामलों में अब नई राह पकड़ चुका है... अपनी नीतियों को मजबूती के साथ मनवाने का साहस भी रखता है... ह्यूस्टन में मोदी का संबोधन और ट्रम्प का गर्मजोशी से मोदी का स्वागत करना सही मायने में भारत-अमेरिका के संबंधों को प्रत्येक पहलू से नया आयाम देने वाला साबित हुआ...
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 सितम्बर 2019 को भारतीय समयानुसार 7.50 बजे संबोधित किया... उनके बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी संबोधित किया... ऐसे में इन दोनों के संबोधनों पर विश्व की निगाहें तो लगी हुई थीं, यह पहली बार हुआ कि भारत ने एक बार भी पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, लेकिन उसकी विश्व शांति के खिलाफ चल रही सारी खुराफातों को तार-तार करने में मोदीजी ने कोई कसर नहीं छोड़ी... पाकिस्तान में मानव अधिकार का उल्लंघन के उन तमाम आंकड़ों और जम्मू-कश्मीर में पाक पोषित आतंकवाद के चलते अब तक जान गंवा चुके लोगों के संबंध में पाकिस्तान की नीति-नीयत को विश्व के समक्ष खोलकर रख दिया...
अमेरिकी भूमि से जो बात कही जाती है, वह विश्व के कोने-कोने तक सुनी भी जाती है, स्वीकार भी जाती है और प्रभावी भी होती है... क्योंकि देशकाल और परिस्थितियों के मान से अनेकों बार वैश्विक चौधराहट के अपने-अपने प्रभाव व तौर-तरीके भी होते हैं... जो मुद्दों, विषयों और समस्याओं को अपने-अपने तरीके से प्रस्तुत करने या आकर्षक पैकेजिंग के जरिए लोगों को उसके समर्थन में खड़े होने के लिए मजबूर कर ही देती है... लेकिन भारत के संदर्भ में अमेरिका की भूमि कुछ अलग ही संकेत व संदेश करती है... अमेरिक की इसी भूमि के शिकागो से 11 सितम्बर 1893 को भारतीय नरेन्द्र अर्थात् स्वामी विवेकानंद ने मेरे अमेरिकी भाइयों-बहनों... संबोधन के जरिए विश्व को भारत की वसुधैव कुटुम्बकम और सर्वे भवंतु सुखिन: की रीति-नीति का भान कराया था... जो आज भी विश्व का मार्गदर्शन कर रही है... अमेरिका की इसी धरती से 1977 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 32वें सत्र को भारत के विदेश मंत्री के रूप में अटलबिहारी वाजपेयी ने संबोधित किया था... उनका उस समय हिन्दी में दिया गया भाषण आज भी देश-दुनिया को मार्गदर्शित कर रहा है... बाद में सुषमा स्वराज ने भी अपने विश्व हितैषी संबोधन के जरिए नई राह दिखाई थी... अब नए भारत के नए नरेन्द्र अर्थात् प्रधानसेवक के रूप में नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र को 2019 में संबोधित करके विश्व शांति की वह राह दिखाई, जो कि विश्व के लिए अति आवश्यक है... सही मायने में नरेन्द्र (स्वामी विवेकानंद) से लेकर नए नरेन्द्र (नरेन्द्र मोदी) तक का यह अमेरिकी धरती पर प्रबोधन विश्व के लिए नई विरासत के रूप में देखा जाना चाहिए...
कुल 17 मिनिट के भाषण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकवाद, विकास, पर्यावरण, सुरक्षा, लोकतंत्र, जनकल्याण पर न केवल बात की, बल्कि अपना वैचारिक विमर्श और भविष्य की कार्य नीति को विश्व के समक्ष भी रखा... प्रधानमंत्री ने ग्लोबल वार्मिंग में हमारा योगदान बेहद मामूली है, कहकर दुनिया की आंखें खोली और कहा कि इससे निपटने में हम सबसे आगे हैं... उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति जीव में शिव देखती है, उन्होंने जनभागीदारी से जनकल्याण व जनकल्याण से जगकल्याण में यकीन को आगे बढ़ाने वाली रीति-नीति का भी उल्लेख किया... उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने कभी भी किसी पर युद्ध नहीं थोपा... बल्कि विश्व को बुद्ध दिए, जो विश्व शांति के प्रतीक हैं... इसलिए यह वैश्विक मंच न केवल पाक की पोल खोलने का आधार बना, बल्कि भारत के लिए यादगार भी रहा...