कई महापुरुषों से बनी भारत की पहचान
   Date05-Oct-2019

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कांग्रेस के नेता शशि थरूर जो पारिवारिक मामले में उलझे हुए है, उनका एक लेख पढऩे को मिला। उनका मानना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी साहसिक निर्णय लेने से लोकप्रिय है, आर्थिक मंदी का उनकी लोकप्रियता पर कोई प्रभाव नहीं है, जो उनका विरोध करता है उसे देशद्रोही करार दिया जाता है। विपक्षी नेताओं को आपराधिक मामलों में फंसाया जा रहा है, लोकतांत्रिक संस्थाओं का सरकारीकरण हो रहा है, अल्पसंख्यक डटे हुए है, तीन तलाक का कानून बनाने और अनुच्छेद 370 का भी उन्होंने अप्रत्यक्ष विरोध करते हुए लिखा कि 'मुझ जैसे उदार लोकतंत्रवादी के लिए सबसे चिंता की बात यह है कि भाजपा के कुशल प्रोपेगेंडा से भ्रमित आम भारतीय और पढ़े लिखे लोग भी ऐसा चाहते है। उन्होंने अंत में लिखा कि किसी भी रूप में मोदी सरकार के पहले सौ दिन, उनके दूसरे कार्यकाल के बारे में कोई संकेत मिलते है तो भारत जल्द ही उस देश के रूप में नहीं रहेगा, जिसे स्वतंत्र कराने के लिए गांधी ने संघर्ष किया था।Ó थरूर की गिनती बुद्धिजीवी वर्ग में होती है। उन्होंने एक बार यही कहा था कि प्रधानमंत्री की हर बात की आलोचना ठीक नहीं है। उनकी यह पीड़ा सही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी साहसिक निर्णय लेने में सक्षम है और आम लोगों में उनकी लोकप्रियता बढ़ रही है। थरूर उदार लोकतांत्रिक विचारक होने के नाते यह तो जानते होंगे जिस नेतृत्व के साथ आम लोग खड़े होते है, उनके समर्थन को अलोकतांत्रिक नहीं कहा जा सकता। जनता की पसंद प्रधानमंत्री के साथ जुड़ी है तो यही माना जाएगा कि प्रधानमंत्री के निर्णय जनता की इच्छा के अनुसार है। यह कहना कि आर्थिक मंदी की चिंता लोगों को नहीं है, इससे यह भी जाहिर है कि लोगों को वैश्विक मंदी की समझ है। लोगों की समझ पर संदेह करना अलोकतांत्रिक विचार ही माना जाएगा। यह कहना कि गांधीजी ने जिस स्वरूप के भारत के लिए संघर्ष किया था वैसा भारत नहीं रहेगा। थरूर ऐसे विचारक है जो यह मानते है कि आजादी के बाद ही भारत का राष्ट्रीय स्वरूप बना और गांधीजी के पहले यह देश नहीं था, गांधी दर्शन की जिन्हें समझ है वे जानते है कि गांधी दर्शन और विचार भारत की हजारों वर्ष की सनातन संस्कृति पर आधारित है। इसीलिए वे रघुपति राघव राजाराम...का गीत गुनगुनाते थे। रामराज्य को उन्होंने आदर्श राज्य का मॉडल माना। श्रीराम के भारत के लिए उन्होंने संघर्ष किया था। इसलिए किसी एक महापुरुष से देश की पहचान नहीं बनती। भारत की पहचान रामकृष्ण, गौतम, महावीर, स्वामी विवेकानंद से लेकर तिलक, गांधी, सुभाष से भी बनी है। लोकतंत्र का स्वरूप भारत की संस्कृति परंपरा एवं एकता-अखंडता के अनुरूप है या नहीं, इस बारे में सार्थक बहस हो सकती है। तुष्टीकरण, भ्रष्टाचार, परिवारवाद और असुरक्षित भारत के पक्ष में गांधीजी कभी नहीं रहे।
दृष्टिकोण
पाक की नई साजिश
अनुच्छेद 370 के हटाने के सवाल पर पाकिस्तान के दुष्प्रचार से दुनिया प्रभावित नहीं हुई। पाक प्रधानमंत्री इमरान द्वारा राष्ट्र संघ के मंच से भारत के खिलाफ जगह उगला, कश्मीर के मामले में परमाणु युद्ध की धमकी दे दी, इसके बाद इक्के-दुक्के देशों के अलावा कोई देश पाक के दुष्प्रचार से प्रभावित नहीं हुए। यह रिसर्च भी सामने आया है कि दोनों देशों के बीच परमाणु युद्ध होता है तो दो-ढाई करोड़ लोग मारे जाएंगे। अब लडख़ड़ाते पाकिस्तान के हुक्मरान पीओके के लोगों को भड़का कर पाकिस्तान नियंत्रण रेखा के पास लाएगा। इन लोगों ने नियंत्रण रेखा को पार किया तो भारत की ओर से तत्काल जवाब दिया जाएगा। हो सकता है कि जवाबी कार्रवाई में पीओके के लोग मारे गए तो पाक यह ढींढोरा पिटेगा कि भारत लोगों को मार रहा है। दिल्ली में भी चार आतंकी घुसने से एयरपोर्टों पर हाई अलर्ट कर दिया है। ये आतंकी, आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के बताए जाते है। ये आतंकी त्योहारों के अवसर पर हमले की साजिश रच रहे है। इस सूचना के बाद दिल्ली पुलिस ने होटलों एवं गेस्ट हाउस में छापेमारी की है। इस दौरान तीन संदिग्धों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दिल्ली में घुसे आतंकियों के पास काफी संख्या में हथियार होना बताया जाता है। पाकिस्तान को परेशानी यह है कि अनुच्छेद-370 को दफनाने के बाद भी कश्मीर में उपद्रव और खून-खराबा नहीं हुआ। अब तो पहले से अधिक कश्मीर में शांति और मामूली पाबंदी के बाद भी स्थिति सामान्य हो रही है। अब पाकिस्तान आतंकियों को घुसपैठ कराकर एवं एलओसी पर लोगों का मार्च कर कश्मीर के लोगों को भड़काना चाहता है। पाकिस्तान को यह जानना होगा कि जीरो टॉलरेन्स की कार्रवाई के द्वारा किसी भी तरह की घुसपैठ को भारत बर्दाश्त नहीं करेगा। पाकिस्तान की साजिश को भारत किसी भी स्थिति में सफल नहीं होने देगा।