अंतिम क्षण तक लिखते रहे 'काल के कपाल पर
    Date14-Oct-2019
 
 
अपूरणीय क्षति : स्वदेश के पूर्व एवं चरैवेति के सम्पादक व राष्ट्रनिष्ठ लेखक श्री जयकृष्ण गौड़ का अवसान
इंदौर  14 अक्टूबर (स्वदेश समाचार)
राष्ट्रभाव से पूर्ण पत्रकारिता की निरंतर अनुगंूज करवाने वाले एवं हिन्दी पत्रकारिता को प्रतिष्ठित करने वाले स्वदेश के पूर्व संपादक, इंदौर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष एवं भाजपा के मुखपत्र 'चरैवेतिÓ के प्रधान संपादक श्री जयकृष्ण गौड़ का सोमवार शाम 6 बजे भोपाल में ह्रदयघात से निधन हो गया। 'काल के कपाल परÓ स्तम्भ के लेखक गौड़ साहब ने अंतिम क्षण तक वैचारिक प्रवाह बनाए रखा। उनके परिवार में पुत्र चंद्रेश गौड़, पुत्रवधू लतागौड़ व पोता गौतम है। 6 अगस्त 1944 को मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के सारंगपुर तहसील में जन्मे श्री गौड़ ने स्वदेश में नगर संवाददाता से लेकर अन्य पदों पर रहते हुए 1991 में संपादक दायित्व की यात्रा प्रारंभ की थी। मीसाबंदी के रूप में गौड़ साहब १९७७ में आपातकाल के दौरान वे जेल में निरूद्ध रहे।
गौड़ साहब के निधन की सूचना मिलते ही पत्रकारिता जगत में शोक की लहर छा गई। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, मुख्यमंत्री कमलनाथ व भाजपा के अनेक पदाधिकारियों ने अपनी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। गौड़ साहब की अंतिम यात्रा मंगलवार 15 अक्टूबर को उनके निज निवास पी-40 गोल्फ लिंक (करूणा सागर अपार्टमेंट के पास) कनाडिय़ा बायपास से प्रारंभ होगी और तिलक नगर मुक्तिधाम इंदौर पर 10.30 बजे अंतिम संस्कार होगा।
मुख्यमंत्री ने जताया शोक
ठ्ठ इंदौर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष जयकृष्ण गौड़ के निधन का दु:खद समाचार प्राप्त हुआ। परिवार के प्रति मेरी शोक संवेदनाएँ। ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान व पीछे परिजनों को यह दु:ख सहने की शक्ति प्रदान करे।
- कमलनाथ, मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश
ठ्ठ इंदौर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष, स्वदेश समाचार पत्र के पूर्व संपादक, वरिष्ठ विचारक, चिंतक और पत्रकार श्री जयकृष्ण गौड़ का आज शाम भोपाल में निधन हो गया। उन्हें मेरी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि। अटलजी, माणकचंदजी वाजपेयी की परंपरा को आगे ले जाने वाले जयकृष्णजी का निधन बड़ी क्षति है।
- सुमित्रा महाजन 'ताईÓ,
पूर्व लोस अध्यक्ष
परिचय - 6 अगस्त 1944 में मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के सारंगपुर तहसील में जन्मे जयकृष्ण गौड़ को पत्रकारिता का सुदीर्घ अनुभव प्राप्त है। बालवय में मान. दत्ताजी उननगांवकर का सान्निध्य प्राप्त कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। राष्ट्रभाव का पोषण उन्हें संघ शाखा के संस्कारों से ही प्राप्त हुआ। आप अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के प्रांतीय उपाध्यक्ष रहे। एम.ए. (राजनीति शास्त्र) व एल.एल.बी. की उपाधि इंदौर से प्राप्त करने के पश्चात आप शासकीय सेवा में रहे। यहां पर पत्रकारिता के ऋषि माणिकचंद वाजपेयी के मार्गदर्शन में पत्रकारिता जगत में प्रवेश किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव होने के कारण सन् 1971 में शासकीय नौकरी त्यागकर स्वदेश दैनिक समाचार-पत्र से नगर संवाददाता के रूप में जुड़े। आपातकाल में आप मीसा में निरुद्ध रहे। सन् 1991 में दैनिक स्वदेश के प्रधान संपादक के रूप में नियुक्त हुए। तब से लेकर आज तक आपकी राष्ट्रवादी लेखनी स्वदेश में सतत प्रवाहित हो रही है।
(प्रथम पृष्ठ से जारी)
प्रमुख उपलब्धियाँ - ठ्ठ संस्थापक चेयरमैन, महर्षि पातञ्जलि संस्कृत संस्थान, म.प्र. शासन ठ्ठ उपाध्यक्ष, म.प्र. संस्कृत बोर्ड (राज्यमंत्री दर्जा) ठ्ठ अध्यक्ष, अखिल भारतीय संपादक परिषद् ठ्ठ अध्यक्ष, इंंदौर प्रेस क्लब ठ्ठ अध्यक्ष-मूल्यागुनत मीडिया अभिकरण ठ्ठ अध्यक्ष, जर्नलिज्म यूनियन ऑफ मध्यप्रदेश (जम्प) ठ्ठ सदस्य-राष्ट्रीय साक्षरता अभियान परिषद् भारत सरकार ठ्ठ हिन्दी सलाहकार समिति-गृह मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय ठ्ठ सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार ठ्ठ प्रेस सलाहकार समिति म.प्र. शासन, राज्य स्तरीय प्रेस, अधिमान्यता समिति म.प्र. शासन ठ्ठ राज्य स्तरीय पं. दीनदयाल उपाध्याय शताब्दी वर्ष समारोह आयोजन समिति सदस्य
विदेश यात्रा- ठ्ठ प्रधानमंत्री मान. नरसिंहरावजी के साथ पेरिस (फ्रांस), प्रधानमंत्री मा. अटलबिहारी वाजपेयी के साथ इंग्लैण्ड, डेनमार्क, साइप्रस एवं बांग्लादेश की यात्रा।
पुस्तक -ठ्ठ 'ज्योतिपथÓ, 'माणिकचंद वाजपेयी की जीवनीÓ तथा प्रवाह, काल के कपाल पर
सम्प्रति : ठ्ठ प्रधान संपादक 'चरैवेतिÓ