सच्चा श्रावक
   Date10-Oct-2019

प्रेरणादीप
म गध के राजा श्रोणिक भगवान महावीर के परम भक्त थे। उन्होंने राज्य में घोषणा करा रखी थी कि राज्य के जो लोग श्रावक व्रत अपना लेंगे, उनका कर माफ कर दिया जाएगा। यह सुनकर सभी स्वयं को श्रावक व्रतधारी बताने लगे, जिससे बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई। समस्या राजा को बताई गई। राजा ने सच्चे श्रावकों की पहचान के लिए एक योजना बनाई। उन्होंने एक बड़े मैदान में काले व सफेद तंबू लगवाए और घोषणा कराई कि सच्चे श्रावक सफेद तंबू में चले जाएँ और शेष काले तंबू में चले जाएँ। घोषणा के कुछ देर में ही सफेद तंबू खचाखच भर गया, जबकि काले तंबू में कुछ ही लोग थे। राजा ने काले तंबू में बैठे लोगों को सच्चा श्रावक घोषित कर दिया और उनका कर माफ कर दिया। अन्य लोगों को राजा का यह निर्णय उचित नहीं लगा। उन्होंने राजा से इस संदर्भ में प्रश्न किया तो राजा ने काले तंबू में बैठे लोगों को बुलाया और उनसे पूछा कि वे स्वयं को सच्चा श्रावक क्यों नहीं मानते? उन लोगों ने उत्तर दिया- 'हम सच्चे मन से श्रावक धर्म का पालन करना चाहते हैं, फिर भी हमसे कोई-न-कोई गलती हो ही जाती है। इसलिए हम स्वयं को सच्चा श्रावक नहीं मानते।Ó प्रश्न पूछने वालों को भान हो गया कि सच्चा श्रावक आडंबर में नहीं, आचरण में विश्वास रखता है।